चारा और दुहाई का काम पूरा है, फिर भी दोपहर की गर्मी कमाई पर भारी लगती है। पशु को भरी नांद के साथ रहने लायक छाया और हवा भी चाहिए।
गर्मी का असर
एनडीडीबी बताता है कि तेज गर्मी में शरीर की गर्मी निकालना मुश्किल हो सकता है। चारा कम खाना, पानी की बढ़ी जरूरत और दूध व प्रजनन पर असर संभव है। गंभीर स्थिति जानलेवा हो सकती है।
अपना हिसाब रखें
दूध, भूख और बाड़े की स्थिति लिखें। पानी भरने और ठंडक का इंतजाम चलाने की मेहनत भी जोड़ें। कटोरा लगाने से निश्चित दूध वापस मिलने का दावा सही नहीं है।
दोपहर में बाड़ा देखें
- पशु जहाँ खड़ा और आराम करता है, वहाँ छाया और हवा जाँचें। सलाहकार से सुधार तय करें।
- साफ पानी हर समय पहुँचाएँ। टंकी के साथ पीने की जगह पर भी आपूर्ति जाँचें।
- ठंडक, जल निकासी और आहार की योजना विशेषज्ञ से बनवाएँ। साँस और व्यवहार देखें; अगले देखभालकर्ता को चिंता वाले पशु की जानकारी दें।
कटोरे की सीमित भूमिका
एटूज़ेड का प्लास्टिक का पानी का कटोरा उचित आपूर्ति के साथ पानी पीने की जगह बनाता है। यह पूरे बाड़े को ठंडा नहीं करता और गर्मी के तनाव का इलाज नहीं है। जगह, सफाई और पानी रुकने के विकल्प पहले तय करें।
तुरंत डॉक्टर कब चाहिए
बहुत हाँफना, मुँह खोलकर साँस लेना, भारी बेचैनी या गिर जाना हो तो तुरंत पशु चिकित्सक से मदद लें। अगली दुहाई का इंतजार न करें।
मजबूत खेत, मजबूत भारत की शुरुआत सुरक्षित दोपहर से भी होती है।
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